मोटर साइकिल बीमा

Q
टू व्हीलर इंश्योरेंस कितने प्रकार के होते हैं ?
Ans

यह दो प्रकार के होते हैं -

कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस  , थर्ड पार्टी इंश्योरेंस 

थर्ड पार्टी इंश्योरेंस   लेना कानूनन जरुरी है, और कॉम्प्रिहेन्सिव इंश्योरेंस  लेना ऑप्शनल।

Q
टू व्हीलर के चोरी होने पर क्लेम कैसे फाइल करते हैं ?
Ans

सबसे पहले नज़दीकी थाने में एफ. आई .आर.  दर्ज कराना चाहिए ।

अपने इंश्योरेंस   कंपनी को घटना की तुरंत सूचना देनी चाहिए ।

क्लेम  के लिए जरुरी कागज़ जैसे की ड्राइविंग लाइसेंस , आर सी कॉपी , पालिसी कॉपी, एफ आई आर कॉपी वगैरह इंश्योरेंस   कंपनी में जल्द से जल्द जमा कराना चाहिए।

Q
इंश्योरेंस क्लेम करने के लिए किन कागज़ों की ज़रूरत पड़ती है ?
Ans

सही तरीके से भरा गया इंश्योरेंस   कंपनी का क्लेम फॉर्मदस्तखत के साथ

वैध रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आर.सी. ) की कॉपी 

वैध ड्राइविंग लाइसेंस की कॉपी

गाड़ी की मरम्मत का असली बिल, पैसों के भुगतान की रसीद और प्रूफ़ ऑफ रिलीज़

इंश्योरेंस   पॉलिसी की कॉपी

दुर्घटना, चोरी या थर्ड पार्टी नुकसान की स्थिति में एफ. आई .आर . की कॉपी

Q
टू व्हीलर इंश्योरेंस में क्लेम कितने तरह से मिलते हैं ?
Ans

इसमें क्लेम दो तरह से मिलता है , पहला- कैशलेस , दूसरा- टू व्हीलर के मरम्मत का असली बिल और पैसों के भुगतान की रसीद जमा करने पर कंपनी द्वारा ग्राहक के बैंक एकाउंट में पैसों की वापसी। 

Q
कैशलेस क्लेम किसे कहते हैं?
Ans

अगर इंश्योरेंस  कंपनी के नेटवर्क में आने वाले गेराज में दुर्घटनाग्रस्त गाड़ी का मरम्मत कराते हैं तो इंश्योरेंस कंपनी पैसों का भुगतान सीधे गेराज को करती है, और ग्राहक को पैसा नहीं देना पड़ता , इसे कैशलेस क्लेम कहते हैं।

Q
टू व्हीलर इंश्योरेंस में कवरेज कब- कब मिलता है?
Ans

टू व्हीलर इंश्योरेंस   में गाड़ी के चोरी हो जाने पर या सड़क में दुर्घटनाग्रस्त होने पर कवरेज मिलता है, और थर्ड पार्टी इंश्योरेंस   में एक्सीडेंट की वजह से किसी और पार्टी को हुए नुक्सान को भी कवर किया जाता है

Q
टू व्हीलर के इंश्योरेंस में प्रीमियम का हिसाब कैसे लगाया जाता है ?
Ans

टू व्हीलर का प्रीमियम जिन खास बातों पर निर्भर करता है, वह है -  मॉडल , इंजन की क्यूबिक कैपेसिटी , वह  कितनी पुरानी है, और किस शहर में रजिस्टर्ड है।

Q
जीरो डेप्रीसिएशन कवर क्या होता है ?
Ans

जीरो डेप्रीसिएशन कवर नई गाड़ियों पर या लगभग दो साल पुरानी गाड़ियों पर लिया जाने वाला ऐड ऑन इंश्योरेंस   कवर है, जिसमें इंश्योरेंस   क्लेम करते समय डेप्रिसिएशन नहीं लगता, जिससे पॉलिसीहोल्डर के जेब पर खर्चे का अतिरिक्त भार नहीं पड़ता। इस ऐड ऑन का प्रीमियम थोड़ा सा ज्यादा  होता है।

Q
टू व्हीलर इंश्योरेंस में नो क्लेम बोनस क्या होता है ?
Ans

अगर पॉलिसीहोल्डर इंश्योरेंस  अवधि के दौरान इंश्योरेंस   कंपनी से कोई भी क्लेम नहीं लेता, तो इंश्योरेंस   कंपनी अगले साल  उसे इंश्योरेंस   के  प्रीमियम  पर डिस्काउन्ट  देती है जिसे “नो क्लेम बोनस” कहते हैं। नो क्लेम बोनस सिर्फ पॉलिसी रिन्यू करते समय मिलता है।

Q
टू व्हीलर इंश्योरेंस में इनश्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू (IDV) क्या होता है ?
Ans

टू व्हीलर की उम्र को आधार बनाकर इंश्योरेंस   कंपनी तय करती है कि सड़क हादसे में दुर्घटना होने पर या चोरी होने पर पॉलिसीहोल्डर को अधिकतम कितने रुपये का क्लेम मिलेगा। इसी को इनश्योर्ड डिक्लेयर्ड  वैल्यू या अधिकतम सम ऐश्योर्ड कहते हैं।

Q
वॉलन्टरी डिडक्शन क्या होता है?
Ans

वॉलन्टरी डिडक्शन में पॉलिसीहोल्डर पहले से तय  करता है कि क्लेम की स्थिति पैदा होने पर वह उसका कुछ हिस्सा अपनी जेब से भरेगा, जिसकी रकम उसके  और इंश्योरेंस कंपनी के बीच पहले से तय होती है। ऐसा करने पर पॉलिसीहोल्डर  को प्रीमियम में छूट मिलती है। जितना ज्यादा वॉलन्टरी डिडक्शन होता है , उतना ही कम  इंश्योरेंस का प्रीमियम होता है।

Q
क्या टू व्हीलर इंश्योरेंस प्लान बदला जा सकता है ?
Ans

पॉलिसी को रिन्यू करते समय इंश्योरेंस प्लान बदला जा सकता है , या किसी दूसरी कंपनी से इंश्योरेंस प्लान लिया जा सकता है।

Q
अगर टू व्हीलर का इंश्योरेंस खत्म हो जाता है, तो क्या करें?
Ans

ऐसा होने पर जल्द से जल्द  जरुरी कागज़ , जैसे - ड्राइविंग लाइसेंस ,पुराने इंश्योरेंस   की कॉपी, आर. सी. और फोटो लेकर इंश्योरेंस   कंपनी में जाना चाहिए और टू व्हीलर का इंस्पेक्शन कराना चाहिए। यदि सब कुछ सही पाया जाता है तो 2 -3 दिन के भीतर नया इंश्योरेंस जारी कर दिया जाता है।