साइबर इंश्योरेंस की क्या आवश्यकता हैं?

Need of Cyber Insurance

इंटरनेट का विकास जितनी  तेज़ी से हुआ है, उतनी ही तेजी से इसने हमारे निजी जीवन में अपनी जगह बनाई है और हमारे  जीवन को प्रभावित किया है। हमारी रोज़मर्रा की बहुत से चीज़े आज  इंटरनेट के अधीन है।

लेकिन इंटरनेट के  इस्तेमाल के साथ कई समस्याएँ भी हमारे जीवन में जुड़ गई है।  इंटरनेट से जुडी कोई भी सेवा हो, चाहे बैंक से  पैसे का लेन -देंन है , इ- मेल करना है , ऑनलाइन शॉपिंग, ट्वीटर, फेसबुक , इंस्टाग्राम इस्तेमाल करना है ,या किसी अन्य सेवा का उपयोग करना है, तो इंटरनेट को अपनी पहचान बताना ज़रूरी  है, सरल भाषा में इसे पासवर्ड कहते हैं। लेकिन अगर किसी ने आपका पासवर्ड चुरा लिया तो आप समझ सकते हैं कि इससे आपको कितना नुकसान हो सकता है। जब तक हमें इस बात की जानकारी होती है , तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।

Cyber Insurance


साइबर इंश्योरेंस  इंटरनेट इस्तेमाल करते समय होने वाली “सुरक्षा चूक” और उसके कारण पैदा होने वाली गंभीर परिस्तिथि से निपटने में सहायता करता है।आज के समय में इंटरनेट से कारोबार करने वाला कोई इ- कॉमर्स व्यापारी हों, या बैंक या सरकारी विभाग, सभी के लिए साइबर इंश्योरेंस  बहुत जरुरी हो गया है। दुनिया भर में सरकारी तथा गैर सरकारी संस्थाएँ बहुत बड़े पैमाने पर  देश की तथा देशवासियों की महत्वपूर्ण जानकारियाँ डाटा के रूप में अपने पास रखती हैं। बहुत सारे साइबर अपराधी इस तरह के डाटा को चुराने के लिए  तरह- तरह के हथकंडे अपनाते हैं और डिजिटल सुरक्षा में होने वाले चूक को ढूंढ़ते रहते हैं, और जैसे ही मौका मिलता है, अपने काम को अंजाम दे देते हैं। फिर इन गोपनीय जानकारियों को अपने फायदे के लिए तरह- तरह से इस्तेमाल करते हैं।  साइबर इंश्योरेंस  इंटरनेट के उपयोग से जुडी इस तरह की दुर्घटनाओं में हुए नुकसान जिसमें पॉलिसी होल्डर को अपने ग्राहकों को भारी मुआवज़े की रकम देना और  क़ानूनी पचड़े में फस जाने पर सहायता देना, आदि को इंश्योरेंस  में कवर करता है। 

साइबर अपराधी साइबर क्राइम को कई तरह से अंजाम देता हैं, वहीँ साइबर इंश्योरेंस  उनके द्वारा किये जाने वाले तरह -तरह के साइबर अपराध से पॉलिसीहोल्डर को कवरेज प्रदान करता है, जैसे-

आइडेंटिटी का इंश्योरेंस  - अक्सर आपने सुना होगा कि किसी ने ऐ.टी.एम. से पैसे चुरा लिए, या क्रेडिट कार्ड से किसी और ने खर्चा कर दिया , या हमारे डिटेल दे कर किसी ने एक बड़ी रकम उधार ले ली है, और इन सब की जानकारी हमें घटना के बाद मिलती है। आज के डिजिटल युग में हम न जाने कितनी बार और कितनी जगह  अपना नाम , पता , जन्म तिथि , पैन नंबर , आधार कार्ड का नंबर, मोबाइल नंबर  जैसी महत्वपूर्ण जानकारियाँ दर्ज करते रहते हैं और बैंक, स्कूल, दफ्तर, अस्पताल, सरकार की कोई स्कीम या यूँ कहें कि अनगिनत कम्पनियाँ अपना कारोबार करने के  लिए लोगों की आइडेंटिटी को अपने पास जमा करके रखती हैं। साइबर अपराधियों द्वारा आपकी आइडेंटिटी की चोरी और उसके गलत इस्तेमाल से होने वाले नुकसान को साइबर इंश्योरेंस  कवर करता है।

सोशल मीडिया की जिम्मेदारी से जुड़ा कवरेज – आज के समय में एक बच्चे से लेकर सेलिब्रिटी तक सोशल मीडिया प्लेटफार्म जैसे फेसबुक, ट्वीटर , इंस्टाग्राम , यू ट्यूब का जम कर इस्तेमाल कर रहा है। लेकिन जाने- अनजाने कभी ऐसी सामग्री पोस्ट हो जाती है जो एक व्यक्ति या लोगों की भावनाओं को ठेस पहुँचाती है, या किसी की छवि को ख़राब करती है, या कोई कॉपीराइट सामग्री बिना इजाजत के छाप दी जाती है। इनसे पैदा होने वाले गंभीर परिणाम और क़ानूनी देव पेंच से जुडी समस्याओं को साइबर इंश्योरेंस  कवर  करता है।

फिशिंग - यह एक ऐसा साइबर अपराध है जिसमें असली वेबसाइट की हू-बहू नकली वेबसाइट बनाई जाती है और आम व्यक्ति उसे ही असली वेबसाइट समझकर अपना यूजर नेम और पासवर्ड डाल देता है, और इस तरह यूजर नेम और पासवर्ड की चोरी हो जाती है। इस तरह न केवल आपका इ-मेल हैक किया जा सकता है, बल्कि  आपके ऑनलाइन ट्रांसेक्शन का डिटेल भी चोरी हो जाता है। अगर वेबसाइट में सुरक्षा को लेकर कोई कमी होती है तो साइबर  अपराधी इसी का फायदा उठाकर अपने काम को अंजाम दे देता है।

मालवेयर द्वारा आक्रमण -माल्वेयर एक तरह का सॉफ्टवेयर है जिसे जानबूझकर इस तरह से बनाया गया है कि वह बिना इजाजत  कंप्यूटर में प्रवेश कर लेता है और  उसकी भाषा , कोड जैसी चीज़ों पर कब्ज़ा जमा लेता है जिससे कंप्यूटर  और उसके सर्वर को अंदर ही अंदर नुकसान  होना शुरू हो जाता है। ट्रोज़न हॉर्स , वायरस , वर्म्स कुछ ऐसे माध्यम के नाम हैं , जिनके द्वारा मालवेयर को कंप्यूटर में प्रवेश कराया जाता है। रैनसमवेयर जैसे मालवेयर के कंप्यूटर में प्रवेश करने के बाद वह आपके डाटा को बंधक बना लेता है और पैसा मिल जाने के बाद ही डाटा रिलीज़ करता है। इसी तरह के अन्य मालवेयर हैं- कमांड एंड कंट्रोल ,स्पाईवेयर आदि।

साइबर स्टॉल्किंग -इसका मतलब है किसी भी डिजिटल माध्यम द्वारा किसी व्यक्ति या संस्था को बदनाम करना या ब्लैकमेल करना। इसमें इंटरनेट द्वारा गलत तरीके से   सोशल मीडिया प्लेटफार्म से  व्यक्तिगत जानकारी हासिल की जाती है और  आपत्तिजनक सामान इकटठा किया जाता है, फिर उसे  ब्लैक मेल करने  ,झूठे आरोप लगाने  या बदनाम करने  के लिए इस्तेमल किया जाता है।  

साइबर इंश्योरेंस  इस तरह के सभी मामलों में कवरेज देता है ।

जिस तरह इंटरनेट के माध्यम से पूरा विश्व सिकुड़ कर रह गया है, उसी तरह से साइबर क्राइम को भी दुनिया के किस भी कोने में बैठकर अंजाम दिया जा सकता है। यदि कोई अपनी निजी और गोपनीय जानकारी आपके पास दर्ज करता है और आप उसे हिफ़ाजत से नहीं रख पाते तो यह एक बड़ा अपराध है जिसके लिए आपको बहुत बड़ी रकम हर्जाने के तौर पर देना पड़ सकता है, और कई  मामलों में यह बड़ा क़ानूनी रूप भी ले लेता है। इस सब से बचना है तो साइबर इंश्योरेंस  लेना एक अच्छा विकल्प है।

लेख में लिखी गई बातें जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से हैं। इस विषय को गहराई से जानने के लिए बाजार में मौज़ूद साइबर इंश्योरेंस  कंपनियों से सीधे जानकारी प्राप्त करें।

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